Category: हिंदी रचनाएँ

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जीवन

जीवन की क्षणभंगुरता और मृत्यु की शाश्वतत्ता के बारे में कवियत्री चिंतन कर रही है और जीवन और मृत्यु में विरोधाभास को भी व्यक्त कर रही है जीवन झूठ है मृत्यु सत्य है अनंत है जो,...

मर्यादा पुरषोत्तम 0

मर्यादा पुरषोत्तम

कभी कभी मैं सोचती हूँ की जहाँ पूरे विश्व में सब लोगों के लिए एक ही कायदे और कानून होते हैं वहीँ भारत में ऐसा क्यों नहीं है | मेरी बात पढ़ के चकरा गए...

गुलाब जामुन 0

गुलाब जामुन

चन्नी को आज घर लौटने में देर हो गई थी| मुन्नू उसका रास्ता देख रहा था | घर में पैर रखते ही मुन्नू उसका थैला टटोलने लगा | थैले में बची खुची कुछ सब्जियां और दो बासी गुलाब जामुन थे  मुन्नू...

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प्रेम का अंक ग्रह

जीवन कितना सरल होता जो कुछ निभाना ना पड़ता और ना कुछ जताना पड़ता लेकिन ऐसा नहीं है | कहते हैं कि जीवन एक बहता  हुआ सागर है और उसमे जो जितना जल्दी तैरना सीखेगा...

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उलझन

तुझसे मेरे गाने बने, तुझ संग मैंने सपने बुने छोटी सी उंगली जो तूने सोते हुए कस के पकड़ी, तो लगा कि मैं तुझको जरूरी हूं तुझे कभी भी आंच नहीं आएगी, मैं तेरी जीवन भर...

मैं अँधेरा भी हूँ मैं उजाला भी हूँ 0

मैं अँधेरा भी हूँ मैं उजाला भी हूँ

मैं अँधेरा भी हूँ मैं उजाला भी हूँ अपने सारे परिवार का मैं निवाला भी हूँ मैं रास्ता दिखाने वाली बाती भी हूँ इक दूजे के मन की थाह बताती पाती भी हूँ जब थकान...

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मैं औरत हूँ

मैं औरत हूँ |   जी हाँ मैं औरत हूँ |   अब आप पूछेंगे की इसमें  नया क्या है |   इसमें तो नया कुछ भी नहीं है लेकिन हमारे साथ क्या क्या...

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एक पाती खुद के नाम

एक पाती खुद के नाम जब जन्मीं थी तब था खुद का खुद से रिश्ता अनमोल था वो , नहीं था सस्ता वास्ता था बस खुद का खुद से खुद से सब कब हुई...

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फिर एक दिन

जब मिले थे हम,  सपने तुम्हारे भी थे सपने मेरे भी थे जब आसमान में उड़े थे, पंख तुम्हारे भी थे पंख मेरे भी थे जब कुछ कर गुज़रने का गज़ब का जूनून था, अरमान तुम्हारे भी...