Category: Poetry & Short Stories

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मैं औरत हूँ

मैं औरत हूँ |   जी हाँ मैं औरत हूँ |   अब आप पूछेंगे की इसमें  नया क्या है |   इसमें तो नया कुछ भी नहीं है लेकिन हमारे साथ क्या क्या...

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एक पाती खुद के नाम

एक पाती खुद के नाम जब जन्मीं थी तब था खुद का खुद से रिश्ता अनमोल था वो , नहीं था सस्ता वास्ता था बस खुद का खुद से खुद से सब कब हुई...

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फिर एक दिन

जब मिले थे हम,  सपने तुम्हारे भी थे सपने मेरे भी थे जब आसमान में उड़े थे, पंख तुम्हारे भी थे पंख मेरे भी थे जब कुछ कर गुज़रने का गज़ब का जूनून था, अरमान तुम्हारे भी...

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वक़्त को थाम लीजिये

  विभा बड़बड़ा रही थी और घर के काम किसी तरह निपटा रही थी | जब मन में गुस्सा हो तो किसी काम में मन कहाँ लगता है | कामवाली ने विभा दीदी का मूड...

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Moms are Moms!

    My love for my son is a bit too protective and is kind of possessive. Since his birth, i haven’t left him alone for a fraction of second. All my timid emotions...